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| भावी योजना |
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यद्यपि जल
विद्युत परियोजनाऐं
आर्थिक रूप से लाभकारी
विद्युत के
स्रोत हैं तथापि भारत में
विद्युत की
कुल स्थापित क्षमता में जल
विद्युत का
हिस्सा वर्ष 1963 से लगातार घट रहा है। जल विधुत का अंश वर्ष 1970 मे 44 प्रतिशत से
घटकर वर्ष 1999 मे 24 प्रतिशत रह गया है। आदर्श हाइड्रो -
थर्मल
अनुपात 40:60 होना चाहिए तथा वर्तमान असंतुलन ही इस प्रणाली के अस्थायित्व के लिए
उत्तरदायी है। सरकार के जल
विद्युत
विकास के लिए उठाए गए कदमों व नीतिगत समर्थन के फलस्वरूप एन.एच.पी.सी. ने अगले 12
वर्षों मे इस क्षमता को बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।
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