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जल शक्ति सार्मथ्य
जल शक्ति सिनेरियो
50,000 MW प्रस्ताव
जल शक्ति तकनीक
जल शक्ति नीति

भारत में मितव्ययी तरीके से दोहन योग्य और व्यवहार्य जल विद्युत संभाव्यता विद्यमान है 60% लोड फैक्टर पर यह संभाव्यता लगभग 84,000 मेगावाट (1,48701 मेगावाट संस्थापित क्षमता) आंकी गई है इसके अतिरिक्त संस्थापित क्षमता के तौर पर 6780 मेगावाट लघु, मिनी तथा माइक्रो हाइडिल योजनाओं से आंकी गई है 94000 मेगावाट समेकित संस्थापित क्षमता के 56 स्थलों की पहचान पम्प स्टोरेज योजनाओं के रूंप में भी की गई है तथापि अभी तक केवल 19.9% संभाव्यता को काम में लाया जा सका है

जल विद्युत के लाभ

·         नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत - दुर्लभ ईंधन भण्डारों की बचत

·         प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण हितैषी

·         दीर्घकालीन प्रथम जल विद्युत परियोजना 1897 में पूरी कर ली गई थी जो अब भी दार्जिलिंग में चल रही है

·         ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में उत्पादन लागत, प्रचालन और अनुरक्षण कम है

·         तत्काल लोड स्वीकारने/अस्वीकार करने तथा जल्दी से चालू और बंद किए जाने वाली क्षमता के कारण व्यस्ततम मांग को पूरा करने तथा तंत्र की विश्वसनीयता और स्थिरता बढ़ाने के लिए उपयुक्त है

·         ताप विद्युत (35%) तथा गैस (लगभग 50%) की तुलना में इसकी क्षमता अधिक (90% से ऊपर) है

·         शुरूंआती स्थापना के बाद उत्पादन लागत मुद्रा स्फीति के प्रभावों से मुक्त रहती है

·         भण्डारण आधारित जल विद्युत योजनाओं से विद्युत के साथ-साथ सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, पेय जल आपूर्ति, नौकायन, मनोरंजन, पर्यटन तथा मत्स्य पालन जैसे लाभ प्राप्त होते हैं

·         सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थित होने के कारण पिछड़े क्षेत्रों का विकास करती है (जैसे - शिक्षा, चिकित्सा, सड़क संचार, टेली कम्युनिकेशन इत्यादि)

 
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